हसरत

की खोल रहा हूँ पिटारा अपनी हसरतों का,
की ऐ हसरत तुझे मालूम तो है ही,
की तू हसरत है मेरी।।

हसरत है मेरी,
की इजहार करूँ अपनी मोहब्बत का।
तू करे इकरार,
यह हसरत है मेरी।
तू कह के तो देख एक बार,
की सोच के बताएगी।
फिर सात जन्मों तक तेरा इंतज़ार रहे,
यह हसरत है मेरी।।

संवारना चाहुँ तेरी बिखरी हुई जुल्फों को।
की अश्कों की दरिया से,
तेरे अस्तित्व के आंसू पोछूँ मैं।
तेरे चेहरे पर ना आने दूँ कभी शिकन कोई।
बेवजह, तेरी हर मुस्कान की
वजह बन जाऊं मैं।
की चुरा लूँ तेरे हर गम को,
और अपनी हर ख़ुशी तेरे नाम कर दूँ,
यह हसरत है मेरी।।

चलूँ हाथ थाम कर तेरा
खुली फिजाओं की सैर को।
की खुद को मगरूर कर लूँ,
तेरी ना ख़त्म होने वाली उन बातों में।
मंजिल बेशक तेरी ही हो,
मगर उस सफर में तेरे साथ चलूँ मैं।
की मुश्किलों की हर घड़ी में रहूं तेरे संग,
यह हसरत है मेरी।
की उस पल तेरे माथे को चूम कर कहूँ,
की अपनी हसरत के साथ हूँ मैं।
यह हसरत है मेरी।।

तेरी हंसी के पीछे छुपा गम,
जानने की हसरत है मुझे।
बारिश में जो आंसू टपके अगर,
उन्हें पहचान लेने की हसरत है मुझे।

ऐ हसरत,
जानता हूँ मैं,
की तू जानती है हसरतें मेरी।
की एक हसरत तो यह भी है,
की तेरी हसरत बन जाऊं मैं।
बस,
कभी टोक मत देना मुझे इन हसरतों पर,
की इन हसरतों ने ही तो तुझे,
मेरी हसरत बना दिया।
की यह हसरत है मेरी,
की जान ले तू,
की तू हसरत है मेरी।
तू हसरत है मेरी।।

Advertisements

4 thoughts on “हसरत

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s