बीते दिनों की बात

एक दिन वो था जब साथ बैठ के चाय की चुस्की लिया करते थे,

एक दिन है आज का जब नज़रे भी नही मिलाते है।

एक दिन वो था जब बिन एक दूजे से बात किये सोते न थे,

एक दिन है आज का जब एक आवाज़ सुनने को तरसते है।।

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न जाने कौनसी ऐसी नाराजगी है,

जिसकी वजह से हो गयी हो दूर इतनी।

न जाने कौनसी वजह है वो,

जिसकी वजह से खफा हो गयी इतनी।।

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क्या याद भी है तुम्हे?

वो रात भर जागना,

बाते करना,

और फिर बातें करते करते सो जाना।

वो तुम्हारा मेरा मजाक उड़ाना,

उसपर मेरा पलटवार करना।

न जाने कहा गुम हो गयी वो रातें,

कहा खो गयी वो प्यार भरी बातें।।

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आज भी जगता हु पूरी रात,

याद करता हु वो पुरानी बात,

दुआ करता हूं यही दिन रात,

लौट आये वो सुनहरी रातें।

वो तमसे होने वाली प्यारी बातें।।

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माना तम्हे प्यार नही मुझसे,

मगर मेरे प्यार की ऐसी सजा तो न दो।

पूछ लिया करो हाल मेरा भले झूठा ही सही,

मगर ऐसे मुह फेरकर हमे तनहा होने की वजह तो न दो।।

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लौटा दो मुझे दोस्ती हमारी,

एक दूसरे के साथ वो मस्ती हमारी।

एक मौका आखरी दे कर तो देखो हमे,

न दे सको तो एक ऐसान कर दो

जीने की तम्मना तो बची नही,

बस ले लो जान हमारी।

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